primary school sangasar

ta: Dholera, dist: Ahmedabad, C.R.C: Hebatpur

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November 14, 2014

शिक्षा में सुधार हेतु आवश्यक कदम ये हो सकते हैं

1) सभी सरकारी स्कूलों को केंद्रीय या नवोदय विद्यालयों के समान बनाया जा सकता है।
2) पूरे देश की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए एक शिक्षा बोर्ड बनाया जा सकता है।
3) अखिल भारतीय स्तर पर सभी राज्यों की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए एक शिक्षक चयन बोर्ड और क्षेत्रीय कार्यालय बनाए जा सकते हैं।

4) कक्षा छठी से छात्रों की अभिरुचि परीक्षा लेकर  विशेषज्ञता -शिक्षा का प्रारम्भ किया जा सकता है।
5) कक्षा छठी से ही छात्रों को कौशलात्मक शिक्षण देना प्रारम्भ किया जा सकता है।
6)  राष्ट्रीय प्रतिभा विकास विद्यालय खोलकर  देश के विभिन्न राज्यों से प्रतिभाशाली
छात्रों का चयन करके उनकी प्रतिभा का विकास किया जा सकता है।
7) अंग्रेजी और मातृभाषाओं के बीच टकराव को कम करने के लिए मातृभाषाओं का राष्ट्रीय सन्दर्भ में एवं अंग्रेजी का अंतर्राष्ट्रीय सन्दर्भ में प्रयोग हो ऐसा प्रावधान किया जा सकता है।
8) छात्रों में भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान और रुझान उत्पन्न करने के लिए पाठयक्रम में भारतीय महापुरुषों की गाथाओं को अनिवार्यता शामिल किया जा सकता है।
9) CCE पर आधारित शिक्षा और परीक्षा प्रणाली के स्थान पर शास्त्रार्थ एवं लिखित परीक्षा को स्थापित किया जा सकता है।
10) शिक्षक- समुदाय को विशेष सुविधाएँ  - (रेलयात्रा , बैंक लोन आदि में) प्रदान की जा
सकती हैं।
11) नैतिक शिक्षा को अनिवार्यता लागू किया
जा सकता है।
12)छात्रों के लिए नैतिक मापदंड बनाए जा सकते हैं जिसमें विद्यालय के सभी शिक्षक प्रत्येक छात्र के व्यवहार का पूरे वर्ष अवलोकन कर सकते हैं। आचरण असंतोषजनक होने पर छात्र के विरुद्ध सकारात्मक दंड का प्रावधान किया जा सकता है।
जिसका उल्लेख उसके रिपोर्ट कार्ड में विस्तार से किया जा सकता है।
13)  यदि बार-बार चेतावनी देने पर भी छात्र अपने आचरण में सुधार नहीं करता तो छात्रहित में उचित दंड का प्रावधान किया जा सकता है।

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